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पूजन

पूजा अथवा पूजन किसी भगवान को प्रसन्न करने हेतु हमारे द्वारा उनका अभिवादन होता है। पूजा दैनिक जीवन का शांतिपूर्ण तथा महत्वपूर्ण कार्य है। यहां भगवान को पुष्प आदि समर्पित किये जाते हैं। वैदिक श्लोकों का उपयोग किसी बड़े कार्य जैसे यज्ञ आदि की पूजा में ब्राहमण द्वारा होता है। सर्वप्रथम प्रथमपूजनीय भगवान गणेश की पूजा की जाती है।

अगर आप रोज पूजा करते हैं। और आपका मन अशांत रहता है। तो इसका मतलब है कि आपकी पूजा पाठ में कहीं कुछ गलती हो रही है। मन की शांति और जिस मनोकामना से पूजा की जा रही है उसकी पूर्ति के लिए पूरे विधान से पूजा किया जाना आवश्यक है। आइये जानते हैं कि पूजा के समय किन बातों का ध्यान रखें।

  • पूजा हमेशा पूर्व दिशा या उत्तर दिशा की ओर मुख करके ही करना चाहिए।
  • घर के मंदिर में सुबह शाम दीपक जरूर जलाएं। एक दीपक घी का सुबह एक दीपक तेल का शाम को जलाना चाहिए।
  • भगवान शिव , भैरव जी ,गणेश जी को तुलसी नही चढ़ानी चाहिए।
  • तुलसी का पत्ता बिना स्नान किये नही तोडना चाहिए।
  • रविवार , एकादशी , संक्रांति के दिन तुलसी का पत्ता नही तोड़ना चाहिए ओर नाही जल देना चाहिए।
  • सूर्य देव को शंख के जल से अघ्र्य नही देना चाहिए।
  • बुधवार , रविवार को पीपल के वृक्ष को जल नही देना चाहिए।
  • केतकी का फूल शिवलिंग पर अर्पित नही करना चाहिए।
  • अपनी जन्म राशि के अनुसार सबसे पहले अपने इष्टदेव को स्मरण करना चाहिए।
  • किसी भी पूजा में मनोकामना पूर्ण के लिए दक्षिणा अवश्य चढ़ानी चाहिए।

जीवन मे लक्षय को प्राप्त करने के लिए पूजन , यज्ञ ओर अनुष्ठान सहायक सिद्ध होते हैं। पूजन करना आपका नित्य कर्म है। और यह हर एक व्यक्ति करता भी है। लेकिन जब आप किसी समस्या का उपचार करना चाहते हैं। तो आपको ज्योतिष के अनुसार पूजन या यज्ञ कराना चाहिए।

पूजन कैसे ब्राह्मणों से कराना चाहिए।

  • जो वेदों की पूर्ण जानकारी रखता हो।
  • जो पूजन से पहले संकल्प ओर ओर पूजन के बाद श्रयोंदान करता हो।
  • जिसने कभी श्राद्ध का भोजन नही किया हो।
  • जिनको मंत्रों की उचारण विधि का पूर्ण ज्ञान हो।

अगर आप कोई भी पूजन या यज्ञ करते हैं। तो इन नियमो का पालन करें।

किसी भी प्रकार की गलतियों से बचने के लिए ओर घर पर पूजन नियम को समझने के लिए आप हमारे दिए गए ( contact us ) पेज पर जाकर हमे संपर्क कर सकते हैं।

। धन्यवाद ।

 

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